उगना महादेव: जब भगवान शिव बने भक्त कवि विद्यापति के सेवक

  

उगना महादेव: जब भगवान शिव बने भक्त कवि विद्यापति के सेवक

महान मैथिली कवि विद्यापति भगवान शिव के परम भक्त थे। उनकी रचनाएं भक्ति, प्रेम और समर्पण से भरी हुई थीं। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं एक छद्म वेश में "उगना" नामक सेवक के रूप में उनके पास आए — यह कथा न केवल भक्त और भगवान के रिश्ते को दर्शाती है, बल्कि समर्पण की पराकाष्ठा भी दिखाती है।

उगना के रूप में भगवान शिव का आगमन

एक दिन एक अजनबी व्यक्ति, जिसकी हालत साधारण से भी नीचे थी, विद्यापति के पास आया और खुद को "उगना" बताकर नौकरी की याचना की। उसने कहा कि उसे उसकी पत्नी परवतिया ने घर से निकाल दिया है और अब वह भूखा है, बेघर है और सिर्फ दो समय की रोटी के बदले उनके सारे काम करने को तैयार है।

विद्यापति की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, परंतु उगना के बार-बार आग्रह के आगे उन्होंने उसे अपने यहाँ रख लिया। उन्हें यह नहीं पता था कि यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं, स्वयं भोलेनाथ हैं।

उगना के कार्य और भक्ति की लीला

उगना विद्यापति के गाय-भैंस चराते, जानवरों को नहलाते, खेतों में काम करते और उनके साथ बैठकर भांग पीते हुए कविताएं सुनते। यह दृश्य स्वयं शिव और भक्त के बीच की एक अद्भुत लीला थी।

एक बार, गर्मी के दिन विद्यापति को प्यास लगी। उगना ने पानी की खोज में जंगल छान मारा, फिर कहीं एकांत में जाकर अपनी जटाओं से गंगाजल निकाल कर लौटा। जैसे ही विद्यापति ने वह जल पिया, वे समझ गए कि यह साधारण जल नहीं, गंगाजल है।

जब विद्यापति ने उगना से सच्चाई पूछी, तो वह टालने लगे। अंततः जब विद्यापति ने उनके चरण पकड़ लिए, तब भगवान शिव को अपना असली रूप प्रकट करना पड़ा। उन्होंने कहा कि वे उगना के रूप में ही उनके साथ रहेंगे, लेकिन यह रहस्य किसी को नहीं बताना है।

पत्नी की गलती और शिवजी का अंतर्धान

कुछ दिनों बाद, उगना कोई काम भूल गए, जिससे विद्यापति की पत्नी नाराज़ हो गईं और उन्हें मारने लगीं। तभी विद्यापति ने चिल्लाकर कहा, "यह तो स्वयं भगवान शिव हैं!" जैसे ही यह कहा गया, भगवान शिव अदृश्य हो गए।

विद्यापति इस घटना से बेहद दुखी हुए और "उगना... उगना..." का जाप करते हुए जंगल में उन्हें खोजने निकल पड़े। उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया।

शिवलिंग का प्रकट होना और मंदिर की स्थापना

अपने भक्त की पीड़ा देखकर भगवान शिव पुनः प्रकट हुए और कहा कि वे अब उनके साथ नहीं रह सकते, लेकिन शिवलिंग रूप में सदैव उनके पास रहेंगे। उसी स्थान पर एक स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसे आज हम उगना महादेव के नाम से जानते हैं।


📍 उगना महादेव मंदिर की विशेषताएं:

  • यह मंदिर बिहार के मधुबनी ज़िले के भीवनपट्टी गाँव में स्थित है।

  • गर्भगृह में शिवलिंग जमीन से 5 फीट नीचे स्थित है, जहां जाने के लिए 6 सीढ़ियाँ उतरनी पड़ती हैं।

  • ठीक ऐसा ही उज्जैन के महाकाल मंदिर में भी होता है।

  • मंदिर का निर्माण 1932 में हुआ था और 1934 के भूकंप में इसे कोई नुकसान नहीं हुआ।

  • परिसर में एक सुंदर सरोवर, एक कुआंयज्ञशाला और संस्कारशाला भी है।

  • मान्यता है कि इसी कुएं से भगवान शिव ने गंगाजल निकाला था, और आज भी भक्त उस जल को पीने के लिए यहाँ आते हैं।


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